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स्त्री, दलित और अल्पसंख्यकों से इतनी दूर क्यों है वामपंथ?

यादव, राजेन्द्र

FormatEbook
Published2004
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह साक्षात्कार भारतीय वामपंथ के धीरे-धीरे अप्रासंगिक होते जाने की प्रक्रिया का विचारोत्तेजक विश्लेषण पेश करता है। यहाँ उत्पीड़ित अस्मितावादी वर्तमान आन्दोलनों के पास विचारधारा के अभाव और वामपंथ के पास ज़मीनी आधार कमियों को गिनाते हुए - दोनों को एक-दूसरे की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है। इस अलगाव की वजह से साम्प्रदायिक राजनीति को उभरने का मौका मिला है। दलित आन्दोलन और साहित्य, जाति से वर्ग में रूपान्तरण, परिवार में परिवर्तन की ज़रूरत, नक्सलवाद, हिन्दुत्ववाद, सेकुलरिज़्म और देह मुक्ति समेत तमाम मुद्दों पर बेबाकी से विचार रखे गए हैं।

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