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राष्ट्रीय शिक्षा पर एक प्रस्तावना

अरविन्दो,

FormatEbook
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
श्री अरविन्द द्वारा 1920-21 में लिखे ये दो आलेख भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा के लिए एक दर्शन प्रस्तुत करते हैं, जो पुरातनपन्थी या यूरोपपरस्त न होकर भारत के अपने ही सत्त्व, बुद्धि और जज़्बे पर आधारित है। वे व्यक्ति, राष्ट्र और मानवता को, जिनका निर्माण करना शिक्षा का उद्देश्य है, भारतीय व हिन्दू अवधारणाओं के आधार पर पुनःपरिभाषित करते हैं। वे आधुनिक पाश्‍चात्य शिक्षा में ज़बरदस्ती, रटन्त प्रणाली आदि के उपयोग की आलोचना करते हैं जिससे बच्चों का स्वाभाविक विकास बाधित होता है। वे टुकड़ों में शिक्षण के स्थान पर विषयों के विस्तारपूर्ण शिक्षण की पैरवी करते हैं।

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