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कौन तय करता है कि मेरी जगह कहाँ है?

चावला, रितिका

FormatEbook
Published2015
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख ऐसी दो छात्राओं की केस स्टडी प्रस्तुत करता है जिनमें से एक डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है और दूसरी को दोस्तों की कमी है क्योंकि वह 'पर्याप्त बुद्धिमान नहीं थी’। यह बताता है कि दोनों मामले भेदभाव से सम्बन्धित हैं और इनके लिए समावेशी शिक्षा का हिस्सा बनना एक चुनौती क्यों है। लेखिका सुझाती हैं कि इसके लिए न केवल बच्चों की मानसिकता में, बल्कि शिक्षकों, स्कूलों, संस्थानों (समुदाय के रूप में) की धारणाओं में भी बदलाव की ज़रूरत है।

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