HomeEducation › निजी और सार्वजनिक पर कुछ असम्‍बद्ध विचार

Cover of निजी और सार्वजनिक पर कुछ असम्‍बद्ध विचार

निजी और सार्वजनिक पर कुछ असम्‍बद्ध विचार

जयदेव, अर्जुन

FormatEbook
Published2016
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में लेखक अपने अकादमिक अनुभवों के आधार पर बच्चों पर निजी और सार्वजनिक स्कूल प्रणाली के प्रभावों का ज़िक्र करते हैं। वे बताते हैं अगर भारत में मध्यम वर्ग बेहतर स्कूलों में मानव और ढाँचागत संसाधनों पर काफ़ी खर्च करता है तो उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलना लाज़मी है। परन्तु इनसे सरकारी स्कूलों की तुलना असंगत होगी। समान स्तर पर यह तुलना केवल कम फीस वाले निजी स्कूलों के साथ ही वाजिब है। अपने अनुभव के दम पर वे दावा करते हैं कि लोगों को प्रबुद्ध, योग्य और कार्यधर्मी बनाने में सार्वजनिक शिक्षा कोई रुकावट नहीं डालती।

More in Education

Browse all →