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खेलने दो!

अडवाणी, काजल

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy $1
About this book
लेख में लेखिका ने अपने बच्चों के खेल-स्नूकर्स और बिलियर्ड्स, उनकी पढ़ाई और खेल से सम्बन्धित यात्रा के अनुभवों को साझा किया है। इसके ज़रिए वे सुझाती हैं कि बच्चों को खेलने और उन्हें उनके सपनों को पूरा करने की आज़ादी देनी चाहिए तथा खिलाड़ी के लिए खेल ही सबसे ऊपर होना चाहिए एवं माता-पिता को उनकी खेल यात्रा में उनका साथ देकर उनकी उड़ान में मदद करनी चाहिए। साथ ही वे खेलों को केवल भौतिक रूप में न देखकर उन्हें उनके समग्र रूप में देखने का आग्रह भी करती हैं।

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