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बालिका विद्यालय में जेंडर की निर्मिति और उसके सामाजिक निहितार्थ

रंजना,

FormatEbook
Published2021
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
हमारे समाज में जेंडर यानी लिंग भेदभाव की जड़ें बहुत गहरी हैं, जिसे हम रोज़मर्रा के जीवन में पल प्रतिपल देखते और महसूस करते हैं। यह लेख एक विद्यालय की दिनचर्या के सूक्ष्म अवलोकनों से पितृसत्तात्मक समाज के पोषण और बालिकाओं की बहिष्करण प्रक्रियाओं को टटोलते हुए जेंडर निर्मिति की परिस्थितियों को सामने रखता है और प्रश्न उठाता है कि समतामूलक समाज बनाने में शिक्षा की महती भूमिका देखते हुए यह समझना लाज़िमी है कि विद्यालय में जेंडर निर्मिति के लिए किस तरह के अनुभव गढ़े जा रहे हैं, और ये पितृसत्ता को मज़बूत बनाते हैं या कमज़ोर करते हैं।

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