Home › Literature › हाशिए का सशक्तीकरण : दलित स्त्रियाँ-हसरतें और अनुभव
हाशिए का सशक्तीकरण : दलित स्त्रियाँ-हसरतें और अनुभव
Full text being prepared
Keep a copy ₹9
About this book
इस शोधपरक आलेख का उद्देश्य दलित स्त्रियों के सशक्तीकरण के बोध की पड़ताल करना है। दरअसल, शहरी क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इस मुद्दे पर पूरी जाँच और चर्चा अभी तक नहीं की गई है। दलित स्त्रियों के सामाजिक सन्दर्भ अक्सर जाति-वर्ग-जेण्डर के तनाव से भरे होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए उनके लिए एक अलग पद्धति तैयार करने की ज़रूरत है ताकि उसके ज़रिये दलित स्त्रियों के सशक्तीकरण की भावना के इस निजी पहलू पर संवेदनशीलता से सोचा-समझ जा सके। यह अध्ययन दलित स्त्रियों के सशक्तीकरण की व्यक्तिपरक समझ को बाहर लाने की कोशिश है। साथ ही यह उनके अनुभवों, उम्मीदों और अपने वातावरण से उनके सामंजस्य बिठाने के प्रयासों पर भी निगाह डालता है।