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विज्ञापन के ज़रिए सम्प्रेषण कला और सामाजिक सोच का विकास

शर्मा, प्रतिभा

FormatEbook
Published2023
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
कक्षा की अपनी गति होती है। कई बार हम स्वाभाविक रूप से पढ़ते-पढ़ाते कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर पहुँच जाते हैं। इस मौक़े से भागने की बजाय, इसका इस्तेमाल सीखने की प्रक्रिया को रोचक व बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है। लेखिका की कक्षा में भी ऐसा ही हुआ। कहानी से बढ़ते-बढ़ते बात विज्ञापन पर जा पहुँची और फिर विज्ञापन के अर्थ, ज़रूरत, समझ, उपयोग, आदि पर चर्चा की तरफ़ मुड़ गई। इस प्रक्रिया में बच्चों की विज्ञापन के बारे में समझ बनी, और बच्चों ने ख़ुद विज्ञापन बनाते हुए अच्छे सम्प्रेषण की समझ भी विकसित की।

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