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किताबों के साथ चलते-चलते…

तिवारी, अलका

FormatEbook
Published2024
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
साहित्य, बच्चों को निर्दोष ख़ुशियाँ देने, उनके व्यक्तित्व को सँवारने, और उनमें ख़ुद-से पढ़ने की आदत बनाने का एक मुख्य ज़रिया है। इस लेख में लेखिका बच्चों के साथ किताबों पर काम करने के दौरान कविता पढ़ाने के क्रम में ऐसे तरीक़े अपनाती हैं जिनसे बच्चे जीवन की जटिलताओं और वास्तविकताओं को जान-समझ सकें। वे समाज में फैली असमानता, हिंसा, जंग, भेदभाव, नफ़रत और ग़ुलामी जैसी विसंगतियों पर चर्चा करते हैं, और इनके कारणों को पहचानने व समाधान में अपनी भूमिका तलाशते हैं। बच्चे कविता-कहानियों के साथ गहराई से जुड़ते हैं, और वैचारिक रूप से समृद्ध होते हैं।

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