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Cover of वे दौड़ते-दौड़ते उड़ने लगे

वे दौड़ते-दौड़ते उड़ने लगे

गुप्ते, अरविन्द

FormatEbook
Published2000
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
प्रस्तुत लेख में पक्षियों के विकास के बारे में बताया गया है। लेखक बताते हैं जैव-विकास के फलस्वरूप पक्षियों में इस प्रकार की शारीरिक ख़ूबियों का विकास हुआ जिसके फलस्वरूप वे उड़ने में सक्षम हो पाए। लेख में इस बात का वर्णन किया है कि अलग-अलग स्थानों पर पाए जाने वाले जीवाश्मों के आधार पर जीवाश्म वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँच पाए कि इतनी सारी खूबियों से लैस पक्षियों का विकास ज़मीन पर रेंगने वाले सरीसृप (रेप्टीलिया) वर्ग के जन्‍तुओं से हुआ है। सरीसृपों से डायनोसोर विकसित हुए और कालान्‍तर में इनसे पक्षियों का विकास हुआ।

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