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ईल का अद्भुत सफ़र

गुप्ते, अरविन्द

FormatEbook
Published2006
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
ईल मछली विश्‍व के लगभग सभी भागों में पाई जाती है। इसका शरीर साँप की तरह लम्बा होता है और इसके शरीर में छोटे आकार के शल्क पाए जाते हैं। 1977 तक लोग इसे साँप ही मानते रहे, लेकिन कार्लो मोंडिनी ने इसका विच्छेदन करके उसके प्रजनन अंग देखे और इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि यह एक मछली है। ईल कहाँ प्रवास करती है? कैसे अपनी संख्या बनाए रखती है? यह समुद्र और नदी दोनों तरह के पानी में कैसे पाई जाती है? इस लेख में ईल को लेकर ऐसी ही तमाम गुत्थियों को सुलझाने का प्रयास किया गया है।

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