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किस्सा प्रारूपिक फूल का

जोशी, सुशील

FormatEbook
Published2006
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख ‘प्रारूपिक’ की अवधारणा के विभिन्न पहलुओं को टटोलता है। हमारे आसपास फूलों में ढेर सारी विविधता दिखाई देती है, लेकिन पाठ्यपुस्तकों में फूल का एक ही प्रारूपिक चित्र मिलेगा। आमतौर पर प्रारूपिक एक अमूर्त अवधारणा होती है। यह कुछ सामान्य लक्षणों का एक समुच्चय होती है जो अध्ययन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। मगर यह भ्रामक भी हो सकती है; ख़ासतौर से तब जब बहुत अधिक विविधता हो। अतः शुरुआत विशिष्ट उदाहरणों से करके धीरे-धीरे एक प्रारूपिक चित्र बनाना चाहिए। किताबों में प्रारूपिक के नाम पर बने चित्रों में वास्तविकता काफ़ी बदले हुए रूप में झलकती है। अतः ठोस से अमूर्त की ओर बढ़ने का तरीक़ा ही अपनाया जाना चाहिए।

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