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स्कूल की अनकही कहानियाँ अब अनकही नहीं

प्रभात,

FormatEbook
Published2021
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
साहित्य यह मौक़े देता है कि हम अनकही बातों को कह और सुन पाएँ। कम कही और कम सुनी जानी वाली बातों को उनके पूरेपन में, पूरी जीवन्तता और विश्वास के साथ एक सहज विस्तार दे पाएँ। बाल साहित्य के प्रकाशन की दुनिया में पिछले दो दशकों से ये प्रयास तेज़ हुए हैं। इस आलेख में लेखक ने एकलव्य प्रकाशन की ‘डिफरेंट टेल्स’ शृंखला के एक कहानी संकलन स्कूल की अनकही कहानियाँ और एक अन्य किताब 'प्यारी मैडम' के बहाने इन अनकहे विषयों और जीवन चरित्रों का विश्लेषण किया है।

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