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अलग-अलग मिज़ाज की किताबें उर्फ़ विधाओं की विद्या

प्रभात,

FormatEbook
Published2020
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख स्कूल के वर्षों में बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा में साहित्य की उपेक्षा से जीवनपर्यन्त बनी रहने वाली साहित्यहीनता का सवाल उठाता है। स्कूल और पुस्तकालय दो ऐसी व्यवस्थाएँ हैं जो साहित्यहीनता के उजाड़ से जूझने में मददगार हो सकती हैं। अलग-अलग मिज़ाज के साहित्य की नज़ीर से विविध विधाओं के उदाहरण देते हुये लेख स्कूलों में साहित्य की गैर मौजूदगी के संदर्भ में कुछ सवाल तो उठाता ही है साथ ही मौखिक साहित्य क्या है, इसमें क्या शामिल है, लिखित साहित्य क्या है, आदि की चर्चा करते हुए उन्हें पढ़ने-समझाने के तौर-तरीक़ों की बानगी भी प्रस्तुत करता है।

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