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Cover of पढ़ने-लिखने में मौखिक भाषा की भूमिका

पढ़ने-लिखने में मौखिक भाषा की भूमिका

पालीवाल, मीनू

FormatEbook
Published2023
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
हम यह जानते हैं कि भाषा मूलतः मौखिक ही होती है, तब भी हम मौखिक भाषा को कक्षाओं में जगह नहीं देते। मौखिक भाषा और पढ़ना-लिखना सीखने में क्या सम्बन्ध है, इसकी पड़ताल करने के लिए लेखिका ने शिक्षकों के साथ मिलकर कुछ गतिविधियाँ कीं। इन गतिविधियों को कर पाने के बाद अधिकांश शिक्षक यह महसूस कर पाए कि मौखिक भाषा इंसान की सुनने व अनुमान लगाने की क्षमता और भाषा संरचना की समझ को बहुत प्रभावित करती है। लेखिका कहती हैं कि यदि टेक्स्ट में जाने-पहचाने शब्द व संरचनाएँ हों, तो उसे पढ़कर समझना कुछ आसान हो जाता है।

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