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सवालीराम : घोड़ा लेटता है, बैठता भी है

सवालीराम,

FormatEbook
Published1996
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
घोड़े का लेटना-बैठना उसकी नींद की अवस्थाओं से सम्बन्धित है। वह केवल गहरी नींद की अवस्था में ही लेटता है, अन्यथा वह खड़े-खड़े नींद की झपकियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में भी ले सकता है। अपने पैरों की रचना के कारण वह बिना गिरे सो सकता है। थकान से बचने के लिए घोड़ा चार में से कोई एक पैर थोड़ा ऊपर उठाकर अपने शरीर का वज़न बाक़ी के तीन पैरों पर डाल देता है। बैठने पर उसके शरीर का पूरा भार गर्दन और पेट के बीच में आ जाता है, जिससे उसके श्वसन तंत्र पर दबाव पड़ता है और उसे साँस लेने में कठिनाई होती है, अगर यह स्थिति 15-20 मिनट से अधिक बनी रहे तो घोड़े के लिए जानलेवा हो सकती है। लेख में इस सन्‍दर्भ में और अधिक चर्चा है।

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