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बड़ों की दुनिया में बच्चे बनाम मेरे दोस्त का घर

नाग, निशा

FormatEbook
Published2020
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
ईरानी फ़िल्म खानेह दोस्त कोजास्त यानी ‘मेरे दोस्त का घर’ केवल अहमद का एक गाँव से दूसरे गाँव तक का सफ़र ही नहीं है, बल्कि बच्चों के प्रति वयस्कों या समाज के बड़े-बूढ़ों का रवैया, उनके विचार, बच्चों पर अधिकार भाव और पितृसत्तात्मक समाज में बच्चों की उस स्थिति को बताती है जो भविष्य में बच्चे को उसी बँधे-बँधाए साँचे में ढलने पर मजबूर कर देती है, जबकि मूल रूप से बच्चे मानवीय मूल्यों के साथ नि:स्वार्थ भाव से अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास रखते हैं।

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