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ए री सखी, चलो भाषा खेलें
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पाठ्यपुस्तक में दिए गए पाठों पर भी दिलचस्प गतिविधियाँ बनाई जा सकती हैं। इस आलेख में लेखक ने पाठ्यपुस्तक में दी गई अमीर ख़ुसरो की पहेलियों पर बच्चों के साथ किए काम का ब्योरा दिया है। उन्होंने बच्चों को ख़ुद ऐसी पहेलियाँ बनाने के मौक़े भी दिए और महसूस किया कि बच्चे शब्दों से खेलें तो उससे वे भाषा के बारे में भी समझते हैं।
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