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अभिनव पंचायती राज व्यवस्था : वैचारिक आधार (राजस्थान : एक विश्लेषण)

चतुर्वेदी, अरुण

FormatEbook
Published1997
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में पंचायती राज की मौजूदा दशा-दिशा की पड़ताल की गई है। पंचायती राज किन कारणों से अपना पूर्ण-स्‍वरूप हासिल करने में असमर्थ है? यदि नहीं, तो क्या कारण हैं कि जिस आशापूर्ण परिप्रेक्ष्य से गाँधीजी ने पंचायती राज का सपना दिया था, वह उस तरह से साकार होता नहीं दिखता? राजस्थान के पंचायती राज के उदाहरण के साथ लेखक तर्कपूर्ण तरीक़े से इस सन्दर्भ में अपने विचारों को साझा करते हैं।

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