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राजनैतिक व्यवस्था टूट रही है

चतुर्वेदी, अरुण

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
राज्य से अपेक्षाओं और राजनैतिक व्यवस्था में आ रहे परिवर्तन लेख का मुख्य विषय है। राजनैतिक दलों के बीच के वैचारिक अन्तरों का क्षीण होना लेखक को चिन्ताजनक लगता है। इस लेख में लेखक वैचारिक राजनीति के अभाव और राजनीति में कट्टरपंथी और पुनरुत्थानवादी ताकतों के उभार के कारणों की पड़ताल करते हुए कई उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। राजनैतिक व्यवस्था के टूटन को समाज के ताने-बाने में टूटन के रूप में प्रस्तुत करते हुए लेख जनता को जिम्मेदारियों से आगाह भी कराता है।

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