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Cover of आतंकवाद को समझने के क्रम में

आतंकवाद को समझने के क्रम में

चतुर्वेदी, अरुण

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अभावों एवं असमानताओं ने आतंकवाद को बढ़ाव दिया लेकिन उसका शिकार निर्दोष लोग होते रहे हैं। पेन्टागन और फिर भारतीय संसद पर आतंकी हमले ने आतंकवाद पर फ़िर से सोचने के लिए बाध्य किया लेकिन जवाब देने के लिए भारत के पास बहुत सीमित विकल्प थे। आतंकवाद न केवल देश के आर्थिक विकास को बाधित करता है, बल्कि यह राज्य की शक्ति को भी कमज़ोर करता है।

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