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स्कूली अर्थशास्त्र की दुविधा और चुनौती
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लेख इस सवाल पर केन्द्रित है कि अर्थशास्त्र स्कूली स्तर पर पाठ्यचर्या में स्थान पाने का माद्दा रखता है या नहीं। एक मत कहता है कि अर्थशास्त्र का आधुनिक संसार को समझने में बहुत योगदान हो सकता है जबकि आलोचक आर्थिक प्रतिरूपों के अमूर्त स्वरूप एवं मान्यताओं को स्कूल स्तर पर समझने के लिए उपयुक्त नहीं बताते। लेखक दोनों ही मतों पर आंशिक सहमति देते हैं और अर्थशास्त्र की प्रकृति पर गहराई से चिन्तन का सुझाव देते हैं। साथ ही एकलव्य फ़ाउण्डेशन में पाठ्यपुस्तक विकास के दौरान इस मुद्दे पर हुए विमर्श को भी सन्दर्भित करते हैं।
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