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सामाजिक अध्ययन के शिक्षकों को याद करते हुए
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About this book
1985-95 के दशक में मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बेहतर सामाजिक अध्ययन शिक्षण की दिशा में एकलव्य द्वारा प्रयास किए जा रहे थे। इस लेख में दिए गए अनुभव उसी दौरान के हैं, लेकिन आज भी ये अनुभव उतने ही माक़ूल हैं। लेखक कहते हैं कि कई बार विस्तृत विवरण और सटीक तर्क देने के बाद भी लोग उन्हें आत्मसात नहीं करते, क्योंकि वे उनकी मान्यताओं या निजी अनुभवों से टकराते हैं। वे बताते हैं कि संवाद के खुलेपन और शिक्षकों के विविध सार्थक अनुभवों के सहारे ही हम मान्यताओं में बदलाव का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।
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