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एकलव्य का सामाजिक विज्ञान कार्यक्रम : अभ्यास पर चिन्तन
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इस विचारोत्तेजक लेख में, लेखक एक ऐसे प्रयोग पर विचार करते हैं जिसने न सिर्फ़ शिक्षार्थियों के, बल्कि शिक्षकों के ज्ञान को भी पुख़्ता किया। यहाँ वे एकलव्य के सामाजिक विज्ञान कार्यक्रम (1985-2002) पर प्रकाश डालते हुए बतलाते हैं कि यह प्रयोग महज़ वैकल्पिक पाठ्यपुस्तक निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि एक समग्र प्रयास होने के नाते इसमें शिक्षक प्रशिक्षण और आकलन भी शामिल थे। आगे वे इस कार्यक्रम में, न सिर्फ़ बच्चों के लिए, बल्कि सभी के लिए अनुभव से सीखने व विकसित होते अभ्यास के साथ खुली-किताब परीक्षा प्रणाली के तौर पर इसमें आने वाली चुनौतियों, अन्तर्दृष्टियों, खुले प्रश्न, प्रश्न बैंक आदि पर प्रकाश डालते हैं।
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