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सतत एवं व्यापक मूल्यांकन : हौव्वा तो नहीं?

शर्मा, कालूराम

FormatEbook
Published2017
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की नीति की आलोचनात्मक पड़ताल करता हुआ लेख इस नीति के क्रियान्वयन की मुश्किलों से रू-ब-रू है। परीक्षा का पारम्परिक ढाँचा, लगातार परीक्षा की प्रताड़ना, बच्चों का नियमित स्कूल न आ पाना, हर सीखने को परीक्षा के मातहत कर देना, अध्यापकों पर काग़ज़ी ख़ानापूर्ति का भारी बोझ, बच्चों की पृष्ठभूमि की अवहेलना आदि नुक़्तों के सहारे लेख इस मूल्यांकन नीति के क्रियान्वयन पर सवाल उठाता है।

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