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मैडम, मेरा जवाब सही है!
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About this book
यह लेख बच्चों के सवालों के प्रति वयस्कों के नज़रिए के बारे में बात करता है। लेखिका भाषा और गणित की कक्षा के कुछ ठोस उदाहरण देते हुए बताती हैं कि वयस्क बच्चों के सवालों और उनके विचारों को तवज्जो नहीं देते हैं। बच्चों के सवाल उनके अनुभवों और अवलोकनों को भी बयाँ करते हैं। लेकिन कक्षा में इन सबकी अनदेखी ही होती है। वे रेखांकित करती हैं कि सवाल पूछना सीखने-सिखाने और ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया का स्वाभाविक और अहम हिस्सा है और कक्षा में बच्चों के सवालों की जगह होनी ही चाहिए।
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