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भारतीय परम्परा में कला और काव्य की सर्जना-प्रक्रिया

त्रिपाठी, राधावल्लभ

FormatEbook
Published2016
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
कला की सृजन प्रक्रिया सम्बन्धी चिन्तन विश्‍व भर में कई स्तरों से होकर गुज़रा है। इसके दर्शन, अध्यात्म, मनोविश्लेषण से लेकर घोर-भौतिकतावादी परिप्रेक्ष्य हैं। यह लेख भारतीय परिप्रेक्ष्य में कला और काव्य के सृजन की बहुस्तरीय व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें लेखक ने ईसा पूर्व में ऐतरेय महिदास और भरतमुनि जैसे वैदिक ऋषियों के साथ आचार्य आनन्दवर्धन; आचार्य अभिनवगुप्त आदि द्वारा कला-सर्जना की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों, विचारों और ज्ञान को शामिल करने का प्रयास किया है।

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