HomeLiterature › भर्तृहरि और उनका भाषादर्शन

Cover of भर्तृहरि और उनका भाषादर्शन

भर्तृहरि और उनका भाषादर्शन

त्रिपाठी, राधावल्लभ

FormatEbook
Published2017
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
व्याकरणशास्त्र और दर्शन की परम्परा में ‘वाक्यपदीयम्’ के प्रणेता भर्तृहरि का एक मौलिक विचारक के रूप में महत्त्वपूर्ण स्थान है। दर्शन के सभी सम्प्रदायों के लिए यह ग्रन्थ अपने रचनाकाल के तुरन्त बाद ही एक चुनौती बना। अन्य किसी भी नवीन विचारों की तरह शुरुआत में भर्तृहरि के मत का मज़ाक बनाया है, लेकिन छठी सदी के बाद दर्शनशास्त्र के क्षेत्र में भर्तृहरि को कोई भी गम्भीर विचारक अनदेखा नहीं कर सकता था। भर्तृहरि का उल्लेख करने वाले दार्शनिकों की एक लम्बी सूची बनाई जा सकती है, जिनमें भारतीय दर्शन परम्परा के स्तम्भ सम्मिलित हैं। यह लेख भारतीय दर्शन परम्परा में वाद-विवाद-संवाद के माध्यम हुई विकास यात्रा का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है।

More by त्रिपाठी, राधावल्लभ

Browse all →

More in Literature

Browse all →