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विस्तृत ढाँचा और क़ानून – बौनी होती क्षमताएँ

दीवान, हृदय कान्त

FormatEbook
Published2010
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
सरकारी सेवाओं के प्रति आम लोग सशंकित रहते हैं। ऐसी छवि है कि सरकारी स्कूल या हॉस्पिटल अथवा अन्य कोई भी सरकारी क्षेत्र प्राइवेट संस्थानों की अपेक्षा निम्‍न दर्जे की सेवाएँ प्रदान करता है। दूसरी तरफ़ सरकारी नौकरियों को मुफ़्त की तनख़्वाह पाने का ज़रिया समझा जाता है। इन समस्याओं की चर्चा करते हुए लेख बताता है कि सरकारी तंत्र अपनी बनावट में दोषपूर्ण है। उसमें रचनात्मकता की कमी है और आदेशों तथा नियमों पर अनुचित ज़ोर है।

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