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सहबन्धन यानी इलेक्ट्रॉन की साझेदारी

जोशी, सुशील

FormatEbook
Published1996
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
ऋणावेशित परमाणु और धनावेशित परमाणुओं का आपस में जुड़ा होना या उनके बीच परस्पर आकर्षण का होना तो स्वाभाविक है। लेकिन जब कई धातुएँ एक किस्म के दो-दो परमाणुओं के जोड़े के रूप में रहती हैं, तो स्थिति में जटिलता आ जाती है। आख़िर ऐसा क्यों होता है? इसका कारण क्या है? इसी प्रश्न को हल करने का प्रयास इस लेख में किया गया है।

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