HomeEducation › श्रव्य-दृष्टव्य : सिनेमा में रेडियो 2.0

Cover of श्रव्य-दृष्टव्य : सिनेमा में रेडियो 2.0

श्रव्य-दृष्टव्य : सिनेमा में रेडियो 2.0

रविकान्त,

FormatEbook
Published2013
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस आलेख में दो प्रसार माध्यमों - रेडियो व सिनेमा - के इतिहास को एक साथ रखकर दिखाने का प्रयास किया गया है। इसमें मनोरंजन के माध्यम से श्रव्याचार के सांस्कृतिक विकास की कहानी को तकनीकी इतिहास के साथ संवाद-क्रम में प्रस्तुत की गयी है। सरकारी प्रतिबन्ध और सामाजिक असहजता से लेकर अंगीकार के बीच फैले पूरे वितान को विभिन्‍न दौर की फिल्मों की कथा व साथ-साथ किये गए सामाजिक सांस्कृतिक विश्लेषण के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

More by रविकान्त,

Browse all →

More in Education

Browse all →