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पाठशाला, शिक्षक और शिक्षा की चाहत
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About this book
उन्नीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में ही भारत पर ब्रिटिश साम्राज्य का शिकंजा कसने लगा था। इसी की परिणति थी भारत के लिए नई शिक्षा व्यवस्था। लेकिन इसका असर पूरे देश में एक समान नहीं हुआ। क्योंकि हमारे देश में शिक्षा और शिक्षा पद्धति में ग़ज़ब की विविधता थी। कुछ जगहों पर परम्परागत शिक्षा व्यवस्था चल रही थी तो कहीं कुछ और। उन दिनों के देश के अलग-अलग क्षेत्रों में चल रही विविध शिक्षा व्यवस्था को दर्शाता है यह लेख।
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