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क्यों पढ़ाते थे वैसे?
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About this book
पढ़ाते समय शायद ही कभी हमारा ध्यान इस बात की ओर जाता हो कि हम कैसे पढ़ाते हैं या उसके बारे में विद्यार्थियों की क्या सोच है। शिक्षा के जमे-जमाए ढाँचे और पाठ्यक्रम के दबाव ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने शिकंजे में जकड़ा हुआ है और इस शिकंजे के भीतर भी पढ़ाई को किसी तरह चलाए रखने के लिए शिक्षक को कितने ही तरीक़े ईजाद करने होते हैं। इनमें से एक तरीक़ा विद्यार्थियों का एक-दूसरे की कॉपियाँ जाँचना है। इस तरीक़े का रचनात्मक उपयोग भी हो सकता है। हमारी स्कूली शिक्षा के सन्दर्भ में बच्चों का अपने साथियों द्वारा सीखना भी एक रोचक पहलू है।
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