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सतत एवं समग्र मूल्यांकन
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आकलन के विभिन्न सैद्धान्तिक और व्यावहारिक सवालों पर चर्चा करता हुआ यह लेख आकलन की अनिवार्यता और उसके मूल्यांकन की अनिवार्यता को भी रेखांकित करता है। सतत और समग्र आकलन के लिए यह लेख इसे अलग से आकलन के तौर पर नहीं देखने की वकालत करता है। यह लेख सुझाता है कि आकलन की प्रक्रिया, प्रशिक्षण और व्यवहार में शिक्षकों की सक्रिय भागेदारी बहुत ज़रूरी है।
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