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सतत एवं समग्र मूल्यांकन

धनकर, रोहित

FormatEbook
Published2015
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
आकलन के विभिन्न सैद्धान्तिक और व्यावहारिक सवालों पर चर्चा करता हुआ यह लेख आकलन की अनिवार्यता और उसके मूल्यांकन की अनिवार्यता को भी रेखांकित करता है। सतत और समग्र आकलन के लिए यह लेख इसे अलग से आकलन के तौर पर नहीं देखने की वकालत करता है। यह लेख सुझाता है कि आकलन की प्रक्रिया, प्रशिक्षण और व्यवहार में शिक्षकों की सक्रिय भागेदारी बहुत ज़रूरी है।

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