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पुस्तकालय के मायने

दीवान, हृदय कान्त

FormatEbook
Published2009
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
लेख पुस्तकालय की उपयोगिता पर प्रकाश डालता है। यह रेखांकित करता है कि पुस्तकालय पढ़ने की, जानने की, सोचने की और अपना मत बनाने की स्वतंत्रता देता है। यह स्वतंत्रता पाठ्यपुस्तकों की बाध्यता से इतर पुस्तकालय की पुस्तकें पाठक को स्वयं चुनने की आज़ादी देती हैं जो पाठक के ज्ञान के दायरे को विस्तृत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसमें लेखक इंगित करते हैं कि पुस्तकालय के बारे में हमारी सामूहिक समझ नहीं है, हमें अपने सोचने के दायरों को बढ़ाना होगा क्योंकि पुस्तकालय का उपयोग बच्चों के विकास व सीखने के लिए बहुत आवश्यक है। इसके लिए व्यापक स्तर पर शिक्षकों व अभिभावकों के साथ संवाद करने की ज़रूरत है।

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