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गुम होती बोलियाँ
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1961 की जनगणना में भारत में बोली जाने वाली भाषाएँ 1652 थीं। 1981 में यह संख्या घटकर मात्र 106 भाषाएँ बचीं। यह एक बहुत बड़ा परिवर्तन भाषा को लेकर देखा गया। जनसंख्या तो बढ़ती गई लेकिन भाषा का ह्रास होता गया। इसके पीछे का सही कारण क्या है? क्या ऐसा सचमुच हुआ है या नहीं? और अगर हुआ है तो उसके पीछे का उचित कारण क्या रहा है? इन विविध प्रश्नों को लेकर इस आलेख में लेखिका ने अपनी बात को उदाहरण और प्रमाणिकता के साथ रखने की कोशिश की है।
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