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बाज़ार की लाठी और अध्यापक : नई आर्थिक नीतियाँ और शिक्षकों के (अदृश्य) सरोकार

सक्सेना, साधना

FormatEbook
Published2011
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख 90 के दशक में नई आर्थिक नीतियों के लागू होने के बाद शिक्षकों पर पड़े उसके प्रभावों की चर्चा करता है। लेख बताता है कि इस दौर में एक तरफ तो शिक्षकों की सेवा शर्तों को क्रमशः बदतर बनाया गया; वेतन में ढाँचागत बदलाव किए गए और दूसरी ओर शिक्षा में गुणवत्ता की कमी का दोष उनके मत्थे मढ़ कर उनकी छवि को नकारात्मक बना दिया गया।

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