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तुमने यह क्या बनाया
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माता-पिता व शिक्षक बच्चों से चित्र बनवाने को एक गौण विषय मानते हैं। लेकिन चित्र बनाने से बच्चों के हाथ का सन्तुलन बनता है, उनकी रचनात्मकता, मौलिक सोच और कल्पनाशीलता का विकास होता है जो उनके मौखिक ओर लिखित रूप में अभिव्यक्त करने की क्षमता को जगा सकती है। बच्चों के लिए ‘चित्रों की दुनिया’ मूर्त है जबकि ‘शब्द–अक्षर’ अमूर्त हैं। वे अपने चित्रों के लिए अधिकतर चटक रंग ही चुनते हैं। अपने चित्रों के बारे में बताने से उनका संकोच दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है। किताबों से नक़ल कर बनवाए गए चित्रों की जगह उनकी स्वाभाविक सोच, कल्पनाशीलता, रचनात्मकता को बढ़ावा देने वाले चित्र बनवाना लाभप्रद होगा।
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