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पंचायती राज : फिर बैतलवा डार पर

भार्गव, नरेश

FormatEbook
Published1997
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
इस लेख में पंचायती राज और इसकी मौजूदा परिस्थितियों का विश्‍लेषण किया गया है। सत्ता के विकेन्द्रीकरण का लाभ कितना जनसाधारण को हुआ है और कितना नहीं, विकास के पैमाने राष्ट्रीय और ग्रामीण स्तर पर समान हैं या नहीं, स्थानीय नेतृत्व सामाजिक एकता और विकास के दृष्टिकोण की बागडोर सँभालने के लिए कितना उत्साहित और समर्थ है, ऐसी ही कई बातों पर अपने विचार साझा करते हुए लेखक ने पंचायती राज की व्यावहारिकता का विश्‍लेषण किया है।

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