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त्यागे गए लोगों पर लेखन: अरण्य में नई आवाज़ें
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लेख दलितों और सवर्णों के बीच की खाई की बात करता है जहाँ दोनों समुदाय एक-दूसरे के विरोध में खड़े हैं। लेखक को लगता है कि ये विरोध इतने तीव्र हैं कि दलितों की आवाज़ों को सुना जाना आसान नहीं है। इस बीच सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ़ दलित जागृति का नतीजा है या फ़िर एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया।