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कट्टरता के मानदण्ड और नये आचार की अपेक्षाएं

भार्गव, नरेश

FormatEbook
Published2001
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह लेख समाज में बढ़ते कट्टरतावादी मानसिकता और उसके खुले प्रदर्शन को अपना विषय बनाता है। लोहिया की मदद से कट्टरता को समझने का प्रयास करते हुए लेखक पाता है कि कट्टरता का चरित्र फ़ासीवादी है। भारत की समन्वयवादी सोच के उलट आज की कट्टरता अन्य धर्मों के ख़िलाफ़ है और जाति तथा जेंडर जैसी प्राचीन सामन्ती जकड़बंदियों की समर्थक है। भारतीय प्रगति के लिए लेखक कट्टरता को बाधक और उदारवाद को ज़रूरी मानते हैं।

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