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बच्चे की क्षमता

दीवान, हृदय कान्त

FormatEbook
Published2009
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
बच्चा चार साल की उम्र तक काफ़ी हद तक भाषा सीख जाता है। वह अपनी सभी ज़रूरतों और भावनाओं को अपनी भाषा के माध्यम से व्यक्त करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, वह तर्क करने, अपने अधिकारों की रक्षा करने, स्थितियों का विश्लेषण करने और अपनी परिकल्पना बनाने में सक्षम होता है। इस लेख में विस्तार से विश्लेषण किया गया है कि कैसे एक बच्चा अपनी दुनिया का निर्माण करता है और जिस भाषा को वह जानता है उसका उपयोग करके अपने सपनों का निर्माण करता है। यह जानने का प्रयास किया गया है कि सीखने की यह प्रक्रिया कैसे बनती है, बच्चे में इसका विकास कैसे होता है। यह लेख उन बातों पर चर्चा करता है जो एक बच्चे को सीखने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। इस लेख में बच्चे की सीखने की प्रक्रिया में नकल की भूमिका, सीमाओं और प्रासंगिकता को भी समझाया गया है। सीखने वाले बच्चे के लक्षणों की पहचान की गई है। उन लक्षणों में प्रमुख हैं : दुनिया का अनुभव करने की इच्छा, सीखने का दृढ़ संकल्प, खुद को व्यक्त करने की इच्छा और जिज्ञासा। अन्त में, शिक्षक के लिए शिक्षार्थी की पृष्ठभूमि, भाषा और संस्कृति से अवगत होने की आवश्यकता और महत्त्व को समझाया गया है।

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