Home › Literature › फीका पड़ता भूमण्डलीकरण और भारत : बाज़ारपरस्ती बनाम पूँजीपरस्ती
फीका पड़ता भूमण्डलीकरण और भारत : बाज़ारपरस्ती बनाम पूँजीपरस्ती
Full text being prepared
Keep a copy $1
About this book
यह लेख शीत-युद्ध, भूमण्डलीकरण, नवउदारवाद और लोकोपकारी राज्य जैसी समाज-राजनैतिक स्थितियों के माध्यम से इतिहास के विभिन्न पड़ावों का जायज़ा लेता है। यह लेख न सिर्फ़ इन संकल्पनाओं पर पुनर्विचार करता है, बल्कि इनके एक-दूसरे के स्थानापन्न रूप से आने के इतिहास को भी खँगालता है। बर्लिन की दीवार गिरने के साथ शीत-युद्ध का अन्त, ब्रेग्ज़िट के साथ भूमण्डलीकरण का ख़ात्मा, धीरे-धीरे अपनी परिणति को पहुँचते लोकोपकारी राज्य और नवउदारवाद के पूँजीवादी चेहरे से लेख सीधे तौर पर मुख़ातिब है। लेखक इन सभी अन्तरराष्ट्रीय राजनीतिक हथियारों से बचने के लिए लोकोपकारी राज्य का पुनः आविष्कार करने के कुछ उपाय भी सुझाता है।
More by दुबे, अभय कुमार
Browse all →कन्धमाल की हिंसा बनाम धर्मनिरपेक्षता
दुबे, अभय कुमार
रीतिकाल-संहार और नायिका-द्वेष
दुबे, अभय कुमार
पटरी से उतरी हुई औरतों का यूटोपिया : राष्ट्रवाद का प्रति-आख्यान
दुबे, अभय कुमार
मैकॉले बनाम भारतीय ज्ञान-प्रणालियाँ और शिक्षा-व्यवस्था : भाग-2
दुबे, अभय कुमार
मैकॉले बनाम भारतीय ज्ञान-प्रणालियाँ और शिक्षा-व्यवस्था : भाग-3
दुबे, अभय कुमार
अँग्रेज़ी का अलौकिक साम्राज्य
दुबे, अभय कुमार
मैकॉले बनाम भारतीय ज्ञान-प्रणालियाँ और शिक्षा-व्यवस्था : भाग-1
दुबे, अभय कुमार
More in Literature
Browse all →
Gambara
Honoré de Balzac
A bankrupt heart, Vol. 2 (of 3)
Florence Marryat
The Queen Pedauque
Anatole France · Jos. A. V. Stritzko
Les Demi-Vierges
Marcel Prévost
The Hidden Masterpiece
Honoré de Balzac · Katharine Prescott Wormeley
Mugby Junction
Charles Dickens
Eeldrop and Appleplex
T. S. (Thomas Stearns) Eliot
La Main Gauche
Guy de Maupassant