Home › Literature › रीतिकाल-संहार और नायिका-द्वेष
रीतिकाल-संहार और नायिका-द्वेष
Full text being prepared
Keep a copy ₹9
About this book
लेखक का मानना है कि रीति-संहार की इस परम्परा पर आधारित विचार-सारणियों का इस्तेमाल साहित्य-लेखन की नई प्रवृतियों पर बन्दिशें लगाने के लिए भी किया गया। साहित्य-लेखन के माध्यम से विकसित हो रहे नारीवादी विचार और सेक्शुअलिटी की अभिव्यक्तियाँ इसके ज़रिए विशेष रूप से निशाना बनाई गईं। प्रेम, यौनिकता और निजी जीवन में स्वायत्तता का दावा करने वाली स्त्री को बीसवीं सदी के पहले वर्ष में जिस साहित्यिक-सांस्कृतिक आक्रमण का सामना करना पड़ा था, वह आज अपनी अलग पहचान का दावा करने वाली स्त्री पर आक्रमण तक विकसित हो गया है। चूँकि यह मामला साहित्य के इतिहास-लेखन से सम्बन्धित है इसलिए लेखक हिन्दी के साहित्येतिहास की गुणवत्ता पर विचार करते हुए यह बताने का प्रयास करता है कि यह इतिहास-लेखन किस मुकाम पर खड़ा है।
More by दुबे, अभय कुमार
Browse all →कन्धमाल की हिंसा बनाम धर्मनिरपेक्षता
दुबे, अभय कुमार
पटरी से उतरी हुई औरतों का यूटोपिया : राष्ट्रवाद का प्रति-आख्यान
दुबे, अभय कुमार
मैकॉले बनाम भारतीय ज्ञान-प्रणालियाँ और शिक्षा-व्यवस्था : भाग-2
दुबे, अभय कुमार
मैकॉले बनाम भारतीय ज्ञान-प्रणालियाँ और शिक्षा-व्यवस्था : भाग-3
दुबे, अभय कुमार
फीका पड़ता भूमण्डलीकरण और भारत : बाज़ारपरस्ती बनाम पूँजीपरस्ती
दुबे, अभय कुमार
अँग्रेज़ी का अलौकिक साम्राज्य
दुबे, अभय कुमार
मैकॉले बनाम भारतीय ज्ञान-प्रणालियाँ और शिक्षा-व्यवस्था : भाग-1
दुबे, अभय कुमार
More in Literature
Browse all →
A bankrupt heart, Vol. 2 (of 3)
Florence Marryat
Mother
Owen Wister
Les Demi-Vierges
Marcel Prévost
The Unclassed
George Gissing
Gobseck
Honoré de Balzac · Ellen Marriage
A Bélteky ház: Tanregény (2. kötet)
András Fáy · Kálmán Mikszáth +1
How to Tell a Story, and Other Essays
Mark Twain
Probable Sons
Amy Le Feuvre