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संविधान और संवाद की संस्कृति

मदान, अमन

FormatEbook
Published2024
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
मानव समाज में विविधता होना लाज़िमी है। यह विविधता विचारों, सामाजिक-आर्थिक स्तर व और भी कई आयामों में हो सकती है। इन सभी विविधताओं के साथ ही हमें एक ऐसा समाज बनाना है जिसमें सभी इंसानों के लिए पारस्परिक इज़्ज़त हो। यह लेख संविधान की अपेक्षाओं में शामिल लोकतंत्र, इंसानी व्यवहार, बन्धुत्व, दोस्ती, ताक़त, विरोध जैसे शब्दों को खँगालता है, और इन्हें व इनके अन्तर्सम्बन्धों को समझने में मदद करता है। यह संवाद को लोकतंत्र के फलने-फूलने के लिए आवश्यक पहलू के रूप में रखता है, और संवाद की संस्कृति कैसे बनाई जाए, इसके कुछ तरीक़े प्रस्तुत करता है।

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