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शिक्षा नागरिकता की विभिन्न संस्कृतियाँ : किसका शिक्षण हो?
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इस लेख में लेखक ने मध्य भारत के अपने अनुभवों के आधार पर सार्वजनिक क्षेत्र में व्यवहार की पद्धतियों सम्बन्धी परस्पर विरोधी विचारों को प्रस्तुत किया और साथ ही नागरिकता सिखाने के तरीक़ों को परिभाषित किया है। एक दृष्टिकोण यह है कि संविधान में निहित समानता, तर्क करना आदि की शिक्षा दी जानी चाहिए। यहाँ लिंग, जाति और अन्य सामाजिक मुद्दों पर आधारित असमानता और वर्चस्व को भी विस्तार से बताया गया है, जिन्हें कक्षा में आमतौर पर जगह नहीं मिलती है। विद्यार्थी कोरा काग़ज़ नहीं होते हैं, वे सामाजिक हक़ीक़त से वाक़िफ़ होते हैं; नागरिकता की शिक्षा देते समय इनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।
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