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स्कूली किताबें और अन्धश्रद्धा

धनकर, रोहित

FormatEbook
Published2007
LanguageHindi
ReadingIncluded
Full text being prepared Keep a copy ₹9
About this book
यह राजस्थान की पाठ्यपुस्तकों पर आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन में दिया गया वक्तव्य है। शिक्षा के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए यह वक्तव्य राजस्थान की तत्कालीन पाठ्यपुस्तकों का आलोचनात्मक विश्लेषण करता है। वक्तव्य बताता है कि पुराने शिक्षा नीति सम्बन्धी दस्तावेज़ शिक्षा का उद्देश्य विवेकशील मनुष्य बनाना मानते हैं जो कि किसी भी लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। लेकिन राजस्थान की पाठ्यपुस्तकें विवेकशीलता की जगह मतारोपण करती हैं और पूर्वाग्रहों का पोषण करती हैं। इस प्रक्रिया में विद्यार्थी विवेक की जगह अन्धश्रद्धा की ओर बढ़ जाते हैं।

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