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सवाल पुस्तक संस्कृति को विकसित करने की ज़रूरत का है
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लेख विद्या भवन सोसायटी, उदयपुर द्वारा आयोजित पुस्तकालय विषयक सेमीनार में लेखक के व्याख्यान को सन्दर्भित करता है। इस व्याख्यान में वे रेखांकित करते हैं कि वर्तमान स्कूली व्यवस्था या तो परीक्षार्थी बनाती है या हद-से-हद साक्षर बनाती है, वह पाठक नहीं बनाती। यही कारण है कि ज़्यादातर लोगों में किसी अच्छी किताब को पढ़ने की तड़प नहीं नज़र आती। साथ ही वे सुझाते हैं कि यदि हमें वास्तव में पढ़ने-पढ़ाने की संस्कृति को स्कूली व्यवस्था और समाज की ज़रूरत बनाना है तो हमें शिक्षा व्यवस्था के हर पहलू पर गहराई से काम करते हुए अच्छे पाठक तैयार करने होंगे।
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