Home › Education › बचपन और साहित्य
बचपन और साहित्य
Full text being prepared
Keep a copy $1
About this book
यह व्याख्यान 'बचपन' शब्द की मीमांसा करता है, बचपन और साहित्य के सम्बन्धों को समझने में शिक्षा की भूमिका पर बात करता है और इनसे गुजरते हुए बाल-साहित्य पर चर्चा करता है। इस व्याख्यान में कानूनों द्वारा बनाए गए बचपन के रूप की चर्चा है। व्याख्यान जेण्डर और जाति की वैचारिकी के बचपन पर असर की व्याख्या करता है। सार्वजनिक शिक्षा, निजीकरण, अँँग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाई, बहुभाषिता आदि पर बातचीत करता हुआ यह व्याख्यान शंकर पिल्लैई की कहानी 'बुढ़िया की रोटी' के माध्यम से बाल-साहित्य की भूमिका और महत्त्व को दर्ज करता है।
More by कुमार, कृष्ण
Browse all →आज़ादी के पचास साल- दिशाहीन शिक्षा
कुमार, कृष्ण
बुनियादी शिक्षा की प्रासंगिकता
कुमार, कृष्ण
शिक्षा का सतत संकट
कुमार, कृष्ण
क्या सीखा, कैसे सिखाया?
कुमार, कृष्ण
भारत में बचपन का अध्ययन
कुमार, कृष्ण
एक सार्वभौमिक विश्व में बचपन
कुमार, कृष्ण
सवाल पुस्तक संस्कृति को विकसित करने की ज़रूरत का है
कुमार, कृष्ण
शिक्षा और ज्ञान
कुमार, कृष्ण
More in Education
Browse all →
Greek in a Nutshell
James Strong
A Bible History of Baptism
Samuel J. (Samuel John) Baird
A Beginner's History of Philosophy, Vol. 2: Modern Philosophy
Herbert Ernest Cushman
ABC's of Science
Charles A. (Charles Alexander) Oliver
The School Book of Forestry
Charles Lathrop Pack
Studies in Civics
J. T. (James Thompson) McCleary
The Scholemaster
Roger Ascham
Civil Government in the United States Considered with Some Reference to Its Origins
John Fiske