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बचपन और साहित्य
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About this book
यह व्याख्यान 'बचपन' शब्द की मीमांसा करता है, बचपन और साहित्य के सम्बन्धों को समझने में शिक्षा की भूमिका पर बात करता है और इनसे गुजरते हुए बाल-साहित्य पर चर्चा करता है। इस व्याख्यान में कानूनों द्वारा बनाए गए बचपन के रूप की चर्चा है। व्याख्यान जेण्डर और जाति की वैचारिकी के बचपन पर असर की व्याख्या करता है। सार्वजनिक शिक्षा, निजीकरण, अँँग्रेज़ी माध्यम में पढ़ाई, बहुभाषिता आदि पर बातचीत करता हुआ यह व्याख्यान शंकर पिल्लैई की कहानी 'बुढ़िया की रोटी' के माध्यम से बाल-साहित्य की भूमिका और महत्त्व को दर्ज करता है।
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