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भारत में बचपन का अध्ययन
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इस लेख की शुरुआत बचपन की दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक यूरोपीय धारणाओं से होती है। इसमें बचपन विषय पर ऐसे अनेक विचारों पर चर्चा की गई है जो पिछली सदी के भारत में प्रबल रहे हैं। साथ ही नई सदी में बच्चों की परवरिश, शिक्षाशास्त्र और राजनीति के लिए उन विचारों के क्या अर्थ हैं, इस पर भी विचार किया गया है। इसमें आगे सामाजिक जेंडर निर्माण के अध्ययन की बात की गई है। अन्त में, बच्चों पर सूचना और प्रौद्योगिकी की दुनिया में हुई क्रान्ति के प्रभाव, सम्भावनाओं और ख़तरों की बात की गई है।
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